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राज्यपाल पर राज ठाकरे नाराज: मनसे प्रमुख ने कहा-छत्रपति शिवाजी महाराज के बारे में आपको कुछ पता भी है? क्यों बोलते हैं, जब कुछ पता नहीं है?

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पुणे2 घंटे पहले

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कॉपी लिंकमनसे चीफ राज ठाकरे पुणे में पार्टी की स्थापना दिवस पर बोल रहे थे। - Dainik Bhaskar

मनसे चीफ राज ठाकरे पुणे में पार्टी की स्थापना दिवस पर बोल रहे थे।

छत्रपति शिवाजी महाराज पर की गई राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी की टिप्पणी से महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना प्रमुख नाराज हो गए हैं। पुणे में एक सभा में राज्यपाल पर निशाना साधते हुए मनसे चीफ ने कहा,‘ये हैं महाराष्ट्र के राज्यपाल, इनको कुछ समझ है क्या? छत्रपति शिवाजी महाराज के बारे में आपको कुछ पता भी है? क्यों बोलते हैं, जब कुछ पता नहीं है?’

राज ठाकरे ने राज्यपाल द्वारा महात्मा फुले और सावित्रीबाई फुले के विवाह से जुड़े संदर्भ पर दिए वक्तव्य पर भी जोरदार नाराजगी जताई। राज ठाकरे ने कहा, ‘किसी ने मुझे उनका कही हुई बात सुनाई। वे कहते हैं- वे इतने छोटे थे, कैसे शादी हो गई, मेरे को पता नहीं…उस वक्त छोटी उम्र में शादियां हुआ करती थीं। आपकी तो अब तक नहीं हुई।’

कुछ भी बोलने से पहले 10 बार सोचना चाहिएअपनी पार्टी एमएनएस की 16 वीं वर्षगांठ के मौके पर पुणे में बोलते हुए राज ठाकरे ने कहा कि शिवाजी महाराज और रामदास स्वामी के बारे में कुछ भी पता ना होते हुए बोलने से पहले राज्यपाल को दस बार सोचना चाहिए। राज ठाकरे ने यह भी कहा कि रामदास स्वामी ने कभी छत्रपति शिवाजी को अपना शिष्य नहीं बताया। शिवाजी महाराज ने भी कहीं यह नहीं उल्लेख किया है कि रामदास स्वामी उनके गुरु थे। जब कुछ पता नहीं हो तो बिना मतलब के राज्यपाल को नहीं बोल कर विवाद पैदा नहीं करना चाहिए।

वोट मांगने के लिए कर रहे महापुरुषों का अपमानराज ठाकरे ने कहा कि हमारे महापुरुष की वीरता को कम आंकना और उनके ही नाम पर वोट मांगना, बस इतना ही काम बाकी है क्या? रामदास स्वामी ने जो छत्रपति शिवाजी महाराज के बारे में लिखा है, वो इतना अच्छा लिखा है कि आज तक वैसा किसी ने वर्णन नहीं किया है। रामदास स्वामी ने शिवराया का वर्णन करते हुए लिखा है- ‘निश्चयाचा महामेरू| बहु जनासी आधारू| अखंडस्थितीचा निर्धारू| श्रीमंत योगी||’

राज्यपाल की इस बात से नाराज हैं राज ठाकरेबता दें कि राज्यपाल ने एक कार्यक्रम में कहा था, ‘चाणक्य नहीं होते तो चंद्रगुप्त को कौन पूछता, रामदास स्वामी नहीं होते तो छत्रपति शिवाजी को कौन पूछता।’ साथ ही उन्होंने महात्मा फुले और सावित्रीबाई फुले के विवाह की उम्र को लेकर भी विवादास्पद बयान दे दिया था। कहा था कि, ‘उस वक्त सावित्रीबाई दस साल की थीं और महात्मा फुले तेरह साल के थे। कैसे हो गई? वे आपस में क्या बात करते होंगे?’ राज्यपाल के इसी बयान पर राज ठाकरे ने आपत्ति जताई है। इसके अलावा राज्यपाल ने इस कार्यक्रम में लॉकडाउन के वक्त के बारे में बताया कि कैसे उस वक्त हर तरफ सन्नाटा छाया हुआ था। सिर्फ पंछियों की आवाजें आती थीं। कोयल ‘कुहू-कुहू’ बोलती थी तो ‘कोविड-कोविड’ सुनाई दिया करता था।

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